11.1 C
Delhi
Monday, December 1, 2025

गिरिजा व्यास जिन्होंने राजस्थान से निकल कर देश की राजनीति में पकड़ बनाई

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री, डॉक्टर गिरिजा व्यास का 78 साल की उम्र में 1 मई को निधन हो गया है. वह राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष  भी रही.

परिवार के मुताबिक़ 31 मार्च, 2025 को उदयपुर के दैत्य मगरी स्थित अपने घर पर जब गिरिजा व्यास “गणगौर पूजा” कर रही थीं तभी एक दीपक की लौ से उनके कपड़ों में आग लग गई. और वे 90 प्रतिशत तक झुलस गई थीं.  इस हादसे के बाद उन्हें अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

राजनीति में पिछले 45 साल से सक्रिय रही डॉक्टर व्यास मूलत: कवयित्री थीं लेकिन वो राजस्थान में कांग्रेस की राजनीति का अहम चेहरा रहीं.

राजस्थान के मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता भजनलाल शर्मा ने गिरिजा व्यास के निधन पर शोक व्यस्त किया है. उन्होंने कहा है, “पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉक्टर गिरिजा व्यास जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है.”

राजस्थान के पूर्व कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी गिरिजा व्यास के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है. उन्होंने लिखा, “पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉक्टर गिरिजा व्यास का निधन हम सबके लिए एक अपूरणीय क्षति है. डॉक्टर गिरिजा व्यास ने शिक्षा, राजनीति एवं समाज सेवा के क्षेत्र में बड़ा योगदान था. उनका इस तरह एक हादसे का शिकार होकर असमय जाना हम सभी के लिए एक बड़ा आघात है. मैं ईश्वर से उनकी आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना करता हूं.”

राजनीतिक सफ़र की शुरुआत

कांग्रेस के पुराने नेता बताते हैं कि जिस वक़्त वे कुछ समय ‘नीम का थाना’ में व्याख्याता रहीं, उसी दौरान वे कांग्रेस नेता नवल किशोर शर्मा के संपर्क में आईं और मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी के कार्यकाल में उन्होंने राजनीति की तरफ गंभीरता से सोचना शुरू किया और जगन्नाथ पहाड़िया के समय उन्हें नगर विकास न्यास का सदस्य बनाया गया.

इमरजेंसी के बाद 1980 के दशक के शुरू में वे ज़िला स्तरीय कांग्रेस संगठन में पदाधिकारी बनीं.

यह वह दौर था जब प्रदेश की राजनीति में गिनी चुनी महिलाएं ही थीं.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉक्टर सीपी जोशी बताते हैं, “गिरिजा व्यास जिस समय विश्वविद्यालय से शिक्षा पूर्ण कर निकलने वाली थीं, उस समय मैं वहाँ दाख़िल हो रहा था.”

गिरिजा को साल 1985 में टिकट मिला और वे उदयपुर से विधायक बनीं. इस तरह कॉलेज में जूनियर रहे जोशी राजनीति में गिरिजा से पांच साल सीनियर हो गए.

मेवाड़ में जोशी और व्यास के बीच राजनीतिक वरिष्ठता का यह द्वंद्व खूब रहा है. इसका असर टिकट बंटवारे पर भी दिखता रहा.

अलबत्ता, डॉ. जोशी कहते हैं, “गिरिजा व्यास ने कांग्रेस में अपनी मेहनत से राजनीति में जगह बनाई. उनका बैकग्राउंड बहुत हंबल रहा है और उन्होंने अपने बूते राजनीतिक कामयाबी अर्जित की.”

साल 1998 में अशोक गहलोत पहली बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने तो उनकी जगह 15 अप्रैल, 1999 को प्रदेश कांग्रेस की कमान डॉक्टर व्यास को सौंप दी गई. वे 16 जनवरी, 2004 तक इस पद पर रहीं.

साल 2003 के विधानसभा चुनाव में सत्ता के स्तर पर अशोक गहलोत और संगठन के स्तर पर गिरिजा व्यास के नेतृत्व में हुई हार अप्रत्याशित तो थी ही, कांग्रेस का 153 सीटों से 57 पर सिमट जाना शर्मनाक भी था.

व्यास प्रदेश कांग्रेस की दूसरी महिला अध्यक्ष थीं. इससे पहले लक्ष्मीकुमारी चूंडावत 24 सितंबर, 1971 से 20 अप्रैल, 1972 तक प्रदेशाध्यक्ष रही थीं.

एक युवा नेत्री का उदय

कहा जाता है कि गिरिजा व्यास जब ताक़तवर हो गईं तो उन्होंने साल 1993 में सीपी जोशी को नाथद्वारा से टिकट नहीं लेने दिया और किशन त्रिवेदी को पार्टी उम्मीदवार बनवाया, जिस मुक़ाबले में भाजपा के शिवदानसिंह जीते.

गिरिजा व्यास राजस्थान की शीर्ष महिला नेताओं में प्रमुख रही हैं. मेवाड़ में उनकी जीत एक युवा नेत्री का उदय था. उस समय सुखाड़िया युग उतार पर था और प्रदेश कांग्रेस की राजनीति एक नई करवट के लिए कसमसा रही थी.

पहली बार गिरिजा व्यास को साल 1988 में मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर के मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री बनाया गया. उनके पास पर्यटन, भाषा, महिला एवं बाल विकास, संस्कृत शिक्षा आदि का स्वतंत्र प्रभार रहा.

दिसंबर, 1989 में माथुर के त्यागपत्र के बाद हरिदेव जोशी मुख्यमंत्री बने तो उन्हें 9 दिसंबर, 1989 को राज्यमंत्री के रूप में स्वतंत्र प्रभार दिया गया.

केंद्रीय राजनीति में पकड़ होती गई मज़बूत

साल 1989 में राजीव गांधी विरोधी लहर चली तो फ़रवरी 1990 में गिरिजा व्यास विधानसभा चुनाव हार गईं. लेकिन जून 1991 के मध्यावधि चुनाव में उन्हें उदयपुर से लोकसभा उम्मीदवार बनाया गया.

गिरिजा व्यास जब राजीव विरोधी लहर के कारण विधानसभा चुनाव हारीं तो राजीव गांधी को लेकर उठी सहानुभूति की लहर में लोकसभा का चुनाव जीत भी गईं.

उसके बाद उनका काँग्रेस पार्टी की केंद्रीय राजनीति में पकड़ का दौर शुरू हुआ और वे पीवी नरसिम्हाराव सरकार में सूचना और प्रसारण उपमंत्री बनी.

लेकिन गिरिजा व्यास के लिए साल 1996 का लोकसभा चुनाव चुनौतीपूर्ण रहा, जिसमें भाजपा ने उनके सामने उनके ही राजनीतिक गुरु महंत मुरली मनोहर शास्त्री को उतार दिया था.

गिरिजा ने गुरु के साथ लोगों के बीच सीधा संवाद किया और अपने तर्कों से लोगों के बीच सहानुभूति बटोरी और राजनीतिक गुरु महंत मुरली मनोहर शास्त्री को हरा दिया.

लेकिन कुछ वर्षों बाद उनका राजनीतिक करियर धीरे-धीरे उतार पर चला गया और मेवाड़ क्षेत्र भाजपा का सुरक्षित किला बन गया.

कुछ साल बाद 2014 में गिरिजा व्यास चित्तौड़गढ़ से खड़ी हुईं, लेकिन भाजपा के युवा चेहरे सीपी जोशी ने उन्हें बुरी तरह हराया.

इसके बाद साल 2018 में बीमार होने के बावजूद पार्टी ने उन्हें उदयपुर विधानसभा सीट से उतारा, जहाँ वे भाजपा नेता गुलाबचंद कटारिया से हार गईं.

यूपीए सरकार के दौरान व्यास को पांचवें राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष के पद पर पहले 16 फरवरी, 2005 और दूसरी बार 9 अप्रैल, 2008 से तीन-तीन साल के लिए मनोनीत किया.

गिरिजा व्यास अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रहीं.

जीवन में कष्टों के भीतर सुखों की साधना

गिरिजा व्यास जब छोटी थीं तभी उनके पिता का निधन हो गया था. उन्होंने अपने परिवार को संभाला और उन्होंने शादी नहीं की.

15 साल शास्त्रीय संगीत और कथक सीखने वाली लड़की को क्या आज कुछ अफ़सोस है, पूछने पर कुछ साल पहले गिरिजा व्यास ने मुझसे कहा था कि वो बहुत खुश हैं और उन्होंने जीवन में तृप्ति की तलाश भी की और कष्टों के भीतर सुखों की साधना भी.

गिरिजा व्यास का जन्म 8 जुलाई, 1946 को नाथद्वारा के श्रीकृष्ण शर्मा और जमुना देवी के घर हुआ था.

उन्होंने उदयपुर के मीरा कॉलेज से स्नातक और एमबी कॉलेज से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की.

इसी कॉलेज ने बाद में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय का रूप लिया. व्यास ने यहीं से दर्शन शास्त्र में पीएचडी भी की. उनकी एक महत्वपूर्ण थीसिस गीता और बाइबिल के तुलनात्मक अध्ययन पर है.

उन्होंने एमए दर्शन शास्त्र में उदयपुर के सुखाड़िया विश्वविद्यालय में गोल्ड मेडल जीता और वे सभी संकायों में टॉप रहीं.

पढ़ाई में अव्वल रहने वाली गिरिजा बचपन में नृत्यांगना बनना चाहती थीं.

माँ उन्हें बुलबुल कहतीं और उम्मीद करतीं कि उनकी बेटी गिरिजा व्यास एक दिन डॉक्टर बनेगी. वे डॉक्टर तो बनीं, लेकिन दर्शनशास्त्र में पीएचडी के बाद उनको यह उपाधि मिली.

गिरिजा व्यास एक निडर वक्ता

सार्वजनिक जीवन में गिरिजा अपने मुखर और निडर स्टैंड के लिए हमेशा चर्चा में रहती थी.

चर्चित दिवराला सती प्रकरण पर गिरिजा ने खुलकर कहा, “सती हिन्दू विश्वास का हिस्सा कभी नहीं रही. पति के निधन पर उसकी देह के साथ पत्नी को जलाना एक अमानुषिक अत्याचार है.”

महिला आयोग की चेयरपर्सन के रूप में उनका कहना था कि महिला अत्याचारों के मामले में पार्टी-पॉलिटिक्स करना बहुत ख़राब बात है.

व्यक्तिगत जीवन में गिरिजा व्यास एक अच्छी दोस्त, अच्छी पड़ोसी, बेहतर शिक्षक, बेहतरीन शायरा, उम्दा गायिका, अच्छी खिलाड़ी, सबकी हमदर्द, मददगार और सियासी समझबूझ वाली थी।

 

 

 

 

Hot this week

राज्यपाल : भारत के राष्ट्रपति द्वारा लद्दाख, हरियाणा और गोवा में नई नियुक्तियाँ

राज्यपाल: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu)...

गुरु पूर्णिमा पर गुरु का मिथुन राशि में प्रवेश इन राशियों के लिए है शुभ

गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima): 10 जुलाई को गुरु पूर्णिमा...

फोर्ब्स टॉप बिलिनेयर्स में मुकेश अंबानी के साथ और कौन शामिल हैं?

अमेरिका की प्रतिष्ठित मैग्जीन फोर्ब्स ने दुनिया के अमीरों...

SIPRI रिपोर्ट: चीन को दुनिया में जंग से मुनाफा; हमास और पाकिस्तान सहित 44 देशों को हथियार बेचे

SIPRI रिपोर्ट: स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) Stockholm...

पुनौराधाम में बनेगा भव्य मंदिर; मिथिलांचल में पर्यटन को बढ़वा

पुनौराधाम (बिहार):  भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म में माता...

Topics

राज्यपाल : भारत के राष्ट्रपति द्वारा लद्दाख, हरियाणा और गोवा में नई नियुक्तियाँ

राज्यपाल: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu)...

फोर्ब्स टॉप बिलिनेयर्स में मुकेश अंबानी के साथ और कौन शामिल हैं?

अमेरिका की प्रतिष्ठित मैग्जीन फोर्ब्स ने दुनिया के अमीरों...

SIPRI रिपोर्ट: चीन को दुनिया में जंग से मुनाफा; हमास और पाकिस्तान सहित 44 देशों को हथियार बेचे

SIPRI रिपोर्ट: स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) Stockholm...

पुनौराधाम में बनेगा भव्य मंदिर; मिथिलांचल में पर्यटन को बढ़वा

पुनौराधाम (बिहार):  भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म में माता...

ट्रैकोमा (Trachoma) मुक्त हुआ भारत; PM मोदी ने कहा यह गर्व का क्षण

ट्रैकोमा (Trachoma) एक आँख की बीमारी है और दुनिया...

थाईलैंड में प्रधानमंत्री शिनावात्रा के खिलाफ कॉल लीक के बाद भीषण प्रदर्शन

थाईलैंड न्यूज: थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा के ख़िलाफ़...

देवभूमि उत्तराखंड में मदरसों के पाठ्यक्रम और मानक सुविधायों की जांच पड़ताल होगी

देवभूमि उत्तराखंड राज्य की बीजेपी की धामी सरकार, उत्तराखंड...

Related Articles

Popular Categories