गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima): 10 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व है। यह दिन गुरुओं का सम्मान और उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक विशेष उत्सव के रूप में मनाया जाता है। आषाढ़ महीने की पूर्णिमा तिथि को महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था इसलिए इस आषाढ़ की पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
गुरु पूर्णिमा का क्या महत्व है?
गुरु पूर्णिमा उन सभी आध्यात्मिक और अकादमिक गुरुजनों को समर्पित परम्परा है जिन्होंने कर्म योग आधारित व्यक्तित्व विकास और प्रबुद्ध करने, बहुत कम अथवा बिना किसी मौद्रिक खर्चे के अपनी बुद्धिमता को साझा करने के लिए तैयार हों। इसको भारत, नेपाल और भूटान में हिन्दू, जैन और बोद्ध धर्म के अनुयायी उत्सव के रूप में मनाते हैं।
गुरु पूर्णिमा, आषाढ़ महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। 2025 में, पूर्णिमा तिथि 10 जुलाई को रात 1:36 बजे शुरू होगी और 11 जुलाई को रात 2:06 बजे समाप्त होगी। इसलिए, गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई को मनाई जाएगी
बौद्ध धर्मावलंबी इस दिन को भगवान बुद्ध के सम्मान में मनाते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि ज्ञान प्राप्ति के बाद इसी दिन उन्होंने सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था। जैन धर्मावलंबी भगवान महावीर और उनके प्रमुख शिष्य गौतम स्वामी के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए गुरु पूर्णिमा मनाते हैं।
इस वर्ष गुरु पूर्णिमा का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन गुरु ग्रह मिथुन राशि में प्रवेश कर रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुरु का मिथुन राशि में गोचर कुछ विशेष राशियों के लिए अत्यंत शुभ फलदायी साबित होगा। इस लेख में आगे जानते हैं किन चार राशियों को इस योग से लाभ होगा?
गुरु ग्रह और उसका महत्व
ज्योतिष में बृहस्पति या गुरु ग्रह को ज्ञान, धन, विवाह, संतान और भाग्य का कारक माना जाता है। यह एक शुभ ग्रह है जिसका गोचर सभी राशियों पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डालता है। जब गुरु किसी राशि में प्रवेश करता है, तो उस राशि और उससे जुड़े भावों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गुरु पूर्णिमा पर गुरु का मिथुन राशि में प्रवेश कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगा, क्योंकि मिथुन राशि गुरु के गुणों के साथ मिलकर एक प्रभावशाली योग का निर्माण करती है।
इन राशियों को मिलेगा विशेष लाभ:
गुरु पूर्णिमा पर गुरु के मिथुन राशि में प्रवेश से मुख्य रूप से चार राशियाँ लाभान्वित होंगी। आइए विस्तार से जानते हैं इनके बारे में,
मिथुन राशि (Gemini)
मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से फलदायी रहेगा। गुरु का आपकी ही राशि में गोचर आपके व्यक्तित्व, स्वास्थ्य और आत्म-विश्वास में वृद्धि करेगा। आपके निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होगा और नए अवसर प्राप्त होंगे। करियर और शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति देखने को मिलेगी। धन लाभ के भी योग बनेंगे। यह समय आपके लिए अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने और नई शुरुआत करने के लिए अनुकूल है।
कुंभ राशि (Aquarius)
कुंभ राशि के जातकों के लिए गुरु का यह गोचर शिक्षा, संतान और प्रेम संबंधों के लिए शुभ रहेगा। जो लोग उच्च शिक्षा प्राप्त करने की सोच रहे हैं, उनके लिए यह उत्तम समय है। संतान प्राप्ति या संतान से संबंधित शुभ समाचार मिल सकते हैं। प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी और अविवाहितों के विवाह के योग बनेंगे। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी और निवेश से लाभ प्राप्त हो सकता है।
धनु राशि (Sagittarius)
धनु राशि के स्वामी स्वयं गुरु ग्रह हैं, इसलिए यह गोचर उनके लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा। गुरु का मिथुन राशि में प्रवेश आपके साझेदारी, विवाह और व्यवसायिक संबंधों को प्रभावित करेगा। व्यापार में नए समझौते हो सकते हैं और साझेदारों के साथ संबंध मजबूत होंगे। वैवाहिक जीवन में खुशहाली आएगी। सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में मान-सम्मान बढ़ेगा। यह समय आपके लिए नए अनुबंधों और collaborations के लिए बहुत अच्छा है।
कन्या राशि (Virgo)
कन्या राशि के जातकों के लिए गुरु का यह गोचर करियर और कार्यक्षेत्र के लिए बहुत शुभ रहेगा। आपको नौकरी में पदोन्नति या वेतन वृद्धि मिल सकती है। व्यवसाय में विस्तार के योग बनेंगे और नए प्रोजेक्ट्स में सफलता मिलेगी। आपके सामाजिक दायरे में वृद्धि होगी और आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अधिक केंद्रित महसूस करेंगे। यह समय आपके लिए पहचान और सफलता दिलाने वाला साबित होगा।

