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Monday, December 1, 2025

बड़ा महादेव पूजा विधि और व्रत का महत्व

Bada Mahadev: ‘बड़ा महादेव’ पूजा भगवान शिव को समर्पित उनके आशीर्वाद के लिए की जाती है जो आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इस वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन बड़ा महादेव का पूजन 9 जून 2025, दिन सोमवार को किया जा रहा है।

शिवभक्त सावन मास, सोमवार तथा बड़ा महादेव पूजन के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। कई शिव मंदिरों में ‘बड़ा महादेव’ के नाम से विशेष अभिषेक और अनुष्ठान किए जाते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। प्राचीन  ‘बड़ा महादेव’ का मंदिर देश के ह्रदय स्थल मध्यप्रदेश में सतपुड़ा के जंगलों के बीच स्थित है.

बड़ा महादेव मंदिर

‘बड़ा महादेव’ का मंदिर, मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित पचमढ़ी के चौरागढ़ में स्थित है यह पचमढ़ी शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर चौरागढ़ पहाड़ी पर स्थित है चौरागढ़ पहाड़ी सतपुड़ा पर्वत की मालाओं के बीच स्थित है। यहाँ मंदिर की चढ़ाई लगभग १३००-१३५० सीढ़ियों की है. यह मंदिर 1326 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. चढ़ाई करते समय, आप सतपुड़ा के प्रसिद्ध जंगलों की हरियाली और पहाड़ियों का सौंदर्य देख सकते हैं.

चौरागढ़ मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में स्थित एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है. यह एक मंदिर और पहाड़ की चोटी भी है जो भगवान शिव को समर्पित है. चौरागढ़ का ‘बड़ा महादेव’ मंदिर अपनी ऊँचाई और आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है. चौरागढ़ पहाड़ के पीछे से ही जन्मीं और दुर्गम पहाड़ी रास्ते पर अठखेलियां करते हुए झिरपा और देनवा नदी बहती हैं जो इस स्थान के सौन्दर्य को और बड़ा देते हैं।

बड़ा महादेव पूजन का महत्व

‘बड़ा महादेव’ से तात्पर्य भगवान शिव के विशाल या सर्वव्यापी स्वरूप से है, जिनकी पूजा से समस्त कष्टों का निवारण होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह पूजन भगवान शिव की असीम शक्ति और कल्याणकारी स्वरूप को समर्पित है। और मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटक स्थल में बड़ा महादेव में मंदिर स्थित हैं, जहां प्रतिवर्ष ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर ‘बड़ा महादेव’ पूजन किया जाता है।

  • समस्त कष्टों का निवारण: भगवान शिव को ‘भोलेनाथ’ कहा जाता है, जो शीघ्र प्रसन्न होते हैं। उनकी पूजा से जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानियां, रोग, दोष और बाधाएं दूर होती हैं।
  • ग्रह दोष शांति: भगवान शिव ग्रहों के अधिपति भी माने जाते हैं। उनकी पूजा से कुंडली में मौजूद अशुभ ग्रह दोष (जैसे शनि, राहु, केतु) के प्रभावों को कम किया जा सकता है।
  • मोक्ष और शांति: शिव की आराधना से मानसिक शांति मिलती है और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • अकाल मृत्यु का भय दूर: महामृत्युंजय मंत्र का जाप और शिव पूजन अकाल मृत्यु के भय को दूर करता है और दीर्घायु प्रदान करता है।
  • मनोकामना पूर्ति: भक्त अपनी विभिन्न मनोकामनाओं जैसे संतान प्राप्ति, धन-धान्य, उत्तम स्वास्थ्य, विवाह या करियर में सफलता के लिए महादेव का पूजन करते हैं।

बड़ा महादेव पूजा विधि

1. प्रातःकाल स्नान और संकल्प:

– सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

– पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।

– हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर भगवान शिव के सामने अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए व्रत और पूजन का संकल्प लें।

2. शिवलिंग/शिव प्रतिमा की स्थापना:

– घर में या मंदिर में शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें। यदि शिवलिंग है तो उसे पूजा में प्राथमिकता दें।

3. अभिषेक/ रुद्राभिषेक:

– यह ‘बड़ा महादेव’ पूजन का सबसे महत्वपूर्ण अंग है।

– जल से अभिषेक: सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल की धारा अर्पित करें।

– पंचामृत अभिषेक: इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण यानी पंचामृत से अभिषेक करें।

– पुनः जल से अभिषेक: पंचामृत के बाद फिर से शुद्ध जल से अभिषेक करें।

– अन्य द्रव्य: आप अपनी सामर्थ्य और इच्छा अनुसार गन्ने का रस, चंदन का जल, इत्र, केसर मिश्रित दूध आदि से भी अभिषेक कर सकते हैं।

– अभिषेक करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप लगातार करते रहें।

4. श्रृंगार और अर्पण:

– अभिषेक के बाद शिवलिंग को पोंछकर साफ करें।

– चंदन: शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं।

– भस्म: भस्म या विभूति अर्पित करें।

– फूल और माला: भगवान शिव को 3 पत्तों वाला बेलपत्र, आक के फूल, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, और सफेद पुष्प अत्यंत प्रिय हैं। इनकी माला बनाकर भी अर्पित कर सकते हैं।

5. धूप, दीप और नैवेद्य:

– घी का दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती करें।

– भोलेनाथ को मिठाई, फल, भांग, धतूरा, या मौसमी फलों का भोग लगाएं। शिव जी को अक्सर ठंडाई और भांग का भोग लगाया जाता है।

6. मंत्र जाप और पाठ:

– ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

– शिव चालीसा, रुद्राष्टक, शिव तांडव स्तोत्र, या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।

– आप अपनी इच्छानुसार शिव पुराण या शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं।

7. कथा और आरती:

– शिव पूजन के बाद शिव कथा पढ़ें या सुनें।

– अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।

– पूजा पूर्ण होने के बाद प्रसाद अर्पित करें।

बड़ा महादेव व्रत

– सोमवार भगवान शिव को समर्पित है, इसलिए इस दिन किया गया ‘बड़ा महादेव पूजन’ एवं व्रत विशेष फलदायी होता है।

– निर्जला/ फलाहार: भक्त अपनी श्रद्धा और शारीरिक क्षमता अनुसार निर्जला या फलाहारी यानी केवल फल खाकर व्रत रखते हैं।

– शिवलिंग पर जल चढ़ाने का महत्व: गर्मी के मौसम में शिवलिंग पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व है, क्योंकि भगवान शिव ने हलाहल विष का पान किया था, जिससे उनके शरीर में अत्यधिक गर्मी थी। जल चढ़ाने से उन्हें शीतलता मिलती है।

– बेलपत्र का महत्व: बेलपत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय है। कहा जाता है कि बेलपत्र की जड़ में स्वयं शिव का वास होता है। बेलपत्र पर ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर चढ़ाना बहुत शुभ होता है।

– रुद्राक्ष धारण: शिव पूजन के बाद रुद्राक्ष धारण करना भी शुभ माना जाता है, क्योंकि रुद्राक्ष शिव का ही स्वरूप है।

बड़ा महादेव की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण करके इस गुफा में राक्षस राजा भस्मासुर को हराया था । इस गुफा के अंदर स्थित ‘बड़ा महादेव’ मंदिर पचमढ़ी में सबसे अधिक देखा जाने वाला मंदिर है। ‘बड़ा महादेव’ लगभग 60 फीट लंबी गुफा है जिसमें भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु, भगवान महेश और भगवान गणेश की प्रतिमाएँ स्थापित हैं।

बड़ा महादेव कैसे पहुंचे?

चौरागढ़ ‘बड़ा महादेव’ मंदिर पचमढ़ी हिल स्टेशन में स्थित है जो सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला पर एक छोटा सा शहर है । यह सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान के जंगल से घिरा हुआ है।

पचमढ़ी पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन पिपरिया है। पचमढ़ी पिपरिया रेलवे स्टेशन से 40 किमी दूर है। पिपरिया और नर्मदापुरम से आसानी से टैक्सी मिल सकती है।

हवाई जहाज से चौरागढ़ मंदिर तक पहुँचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा भोपाल का राजा भोज हवाई अड्डा (230 किमी) है।

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