चिंदांग फेस्टिवल (Chindang Festival) भारत के अरुणाचल प्रदेश में सजोलांग या मिजी (Miji, (or Sajolang) समुदाय का एक पारंपरिक खेती से जुड़ा त्योहार है, जो फसल कटाई के मौसम में अच्छी फसल के लिए पहाड़ी देवताओं को धन्यवाद देने, खुशहाली और अच्छी सेहत के लिए धन्यवाद देने के लिए मनाया जाता है।
चिंदांग फेस्टिवल (Chindang Festival)
अरुणाचल प्रदेश और असम-अरुणाचल प्रदेश की सीमावर्ती स्थानों में रहने वाले मिजी (सजोलांग) जनजाति समुदाय के लोग इस पारंपरिक फसल उत्सव, चिंदांग फेस्टिवल (Chindang Festival) को मनाते हैं इसमें समुदाय के परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ पारंपरिक वेशभूषा में सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रार्थनाएं, पारंपरिक खेल आदि आयोजित होते हैं, जो इनकी संस्कृति की जीवंत विरासत और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के मूल्यों को दिखाते हैं।
यह फेस्टिवल राज्य के बाहर भी कई अन्य राज्यों और विदेश में मनाया जाता है। सरकार दवात अरुणाचल प्रदेश की संस्कृति, रहन सहन, समाज और पर्यटन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उदेश्य से इस उत्सव को देश की राजधानी दिल्ली में भी आयोजित किया जाता है।
मिजी (सजोलांग) समुदाय
मिजी (या सजोलांग) भारत के अरुणाचल प्रदेश में रहने वाला एक समुदाय है। प्रदेश के कई जिलों में रहते हैं, जिनमें वेस्ट कामेंग, ईस्ट कामेंग और कुरुंग कुमे शामिल हैं। उनकी आबादी 37,000 है और वे असम से सटे सब-हिमालयी पहाड़ियों के निचले हिस्सों में भी रहते हैं तथा इस समुदाय के लोग सजोलांग भाषा बोलते हैं।
मिजी महिलाओं की पारंपरिक पोशाक में टखने तक लंबा सफेद कपड़ा और एक खूबसूरती से सजा हुआ लाल जैकेट होता है। अरुणाचल प्रदेश या अन्य दूसरी क्षेत्रीय जनजातियों से उलट, मिजी लोग चांदी के गहने और कांच/पीतल के हार पहनते हैं। इस मिजी समुदाय के लोगों द्वारा सौन्दर्य प्रसाधन, देशी या प्राकृतिक या नेचुरल तरीके से, जैसे चीड़ के राल और कोयले से बनाए जाते हैं
जीववाद या सर्वात्मवाद (Animism) क्या है?
जीववाद या सर्वात्मवाद (Animism) वह दार्शनिक, धार्मिक या आध्यात्मिक विचार है कि आत्मा न केवल मनुष्यों में होती है वरन् सभी जन्तुओं, वनस्पतियों, चट्टानों, प्राकृतिक परिघटनाओं (बिजली, वर्षा आदि) में भी होती है। इससे भी आगे जाकर कभी-कभी शब्दों, नामों, उपमाओं, रूपकों आदि में भी आत्मा के अस्तित्व की बात कही जाती है। सर्वात्मवाद का दर्शन मुख्यतया आदिवासी समाजों में पाया जाता है परन्तु यह शिन्तो एवं हिन्दुओं के कुछ सम्प्रदायों में भी पाया जाता है।
एक विक्टोरियन मानवविज्ञानी ई.बी. टायलर की परिभाषा के अनुसार, एनिमिस्ट “सभी प्रकृति की चेतनता” में विश्वास करते हैं, और उन्हें “आध्यात्मिक प्राणियों की भावना, पेड़ों, चट्टानों और झरनों में निवास करने” के रूप में वर्णित किया जाता है।
ज़्यादातर मिजी लोग एनिमिज़्म को मानते हैं, हालांकि कुछ लोगों ने विदेशियों के द्वारा चलाए जा रहे धर्म परिवर्तन के कुचक्र में फंस कर ईसाई धर्म अपना लिया है। मिजी लोग एक खास धर्म मानते हैं जो पूरी तरह से प्रकृति और भगवान पर आधारित है (प्रकृति, भगवान के द्वारा बनाई हुई उनकी ही एक छबि है)।
इस समुदाय द्वारा झांगलहांग-मियुंगझिन (Zhanglhang-Miungzhin) की सबसे बड़े देवता के रूप में पूजा की जाती है। मिजी लोग मानते हैं कि भगवान, प्रकृति के हर तत्व और जीव में मौजूद हैं, जैसे पेड़, पानी की धाराएँ और पत्थर भी। चिंदांग (Chindang Festival), अक्टूबर माह में मनाया जाता है,
सांस्कृतिक और भाषाई रूप से, मिजी और ह्रुसो अकास (Hrusso Akas ) एक ही समूह के हैं। उनके पूर्वजों को बोर (रोबो) या तानी का भाई कहा जाता है, जैसे न्यिशी, अपतानी, टैगिन, गैलो और आदि (Nyishis, Apatanis, Tagins, Galos and the Adis), जिनमें कुछ सामान्य बातें हैं लेकिन वे अपने आप में अलग भी हैं। रोबो बड़े भाई और न्यिबो (तानी) छोटे भाई हैं, जो असल में एक ही पिता के बेटे थे।
पश्चिम में बौद्ध जनजातियों के साथ लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संपर्कों के कारण इन लोगों में कुछ बौद्ध प्रभाव भी है, जैसे लोसर का उत्सव और प्रार्थना झंडों का इस्तेमाल इनके द्वारा किया जाना इसके कुछ संकेत हैं
अरुणाचल प्रदेश की विविध जनजातीय और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार यहाँ कई अन्य और त्योहार भी मनाए जाते हैं, जिसमें सोलुंग (Solung), ड्री (Dree), लोसर (Losar) और चलो-लोकू (Chalo-Loku) महत्वपूर्ण हैं। सोलुंग आदि समुदाय (Adi community) का एक बड़ा फसल कटाई का त्योहार है, जबकि ड्री त्योहार, अपातानी (Apatani tribe) जनजाति मनाती है। लोसर, मोनपा लोगों (Monpa people) का एक खास त्योहार है, और चलो-लोकू, नोक्टे समुदाय (Nocte community) के लोगों लिए महत्वपूर्ण त्योहार है।



