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Monday, December 1, 2025

FSB रिपोर्ट ने रूस को चीन के साथ दोस्ती पर पुतिन को सावधान किया

FSB Report: दुनिया भर के उन तमाम देशों में जिन्होंने चीन से कर्ज नहीं लिया है या कर्ज लेकर भी आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की सोच है, चीन सरकार, चीन के बने उत्पाद या उसके नागरिकों को सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता है और उसका प्रमुख कारण विगत कई दशकों से चीन द्वारा विभिन्न माध्यमों से की जा रही तकनीक की चोरी और जासूसी.

चीन का इतिहास विकसित ही नहीं, विकाशशील और गरीब देशों की जासूसी का रहा है और इसका प्रमाण समय समय पर पीड़ित देशों द्वारा चीन के विरुद्ध उठाए गए कदम है इसी तरह की गोपनीय रिपोर्ट रूस की एजेंसी FSB (The Federal Security Service of the Russian Federation) ने हाल ही में जारी की है इस FSB रिपोर्ट में चीन की दोस्ती से रूस के राष्ट्रपति पुतिन को सावधान किया गया है। और रूस चीन संबंधों (Russia China Relations) के बारे में चेताया गया है। FSB के दस्तावेज चीन को दुश्मन मानते हैं. कहा गया है कि चीन, रूस के सैन्य रहस्य चुराने और जासूसी करने की कोशिश कर रहा है.

अक्सर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कहते हैं कि चीन के साथ उनके देश की दोस्ती बहुत मजबूत है. दोनों देश मिलकर सैन्य और आर्थिक क्षेत्रों में शानदार काम कर रहे हैं. लेकिन रूस की खुफिया एजेंसी FSB के गुप्त दस्तावेज बताते हैं कि हकीकत में सब कुछ इतना अच्छा नहीं है. FSB की एक खास इकाई चीन को ‘दुश्मन’ मानती है और उसे रूस के लिए सबसे बड़ा खतरा समझती है.

अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक आठ पेज के गोपनीय दस्तावेज के अनुसार, FSB का मानना है कि चीन रूस के सैन्य रहस्य चुराने की कोशिश कर रहा है. चीन रूसी वैज्ञानिकों को लुभाकर उनकी मदद से सैन्य तकनीक हासिल करना चाहता है. साथ ही, वह यूक्रेन में चल रहे युद्ध की जासूसी कर रहा है ताकि पश्चिमी हथियारों और युद्ध की रणनीतियों के बारे में जानकारी जुटा सके.

इस गोपनीय FSB रिपोर्ट का उजागर होना थोड़ा हैरान करने वाला है क्योंकि यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब रूस, भारत से अपील कर रहा है कि चीन से दोस्ती मजबूत करनी चाहिए. इसके लिए हाल ही में रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई लावरोव ने रूस-चीन-भारत वाले एक ग्रुप को फिर से जिंदा करने की जरूरत बताई थी.

स्वतंत्र रूप से किसी ने भी इस रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की है

चीन के अतिक्रमण की योजना?

रूस की एजेंसी FSB को डर है कि चीन, रूस की जमीन पर दावा करने की योजना बना रहा है. कुछ चीनी विशेषज्ञ रूस के सुदूर पूर्वी इलाकों में प्राचीन चीनी इतिहास की खोज कर रहे हैं, जिससे भविष्य में सीमा विवाद को पैदा किया जा सके. इसके अलावा, चीन आर्कटिक क्षेत्र में खनन कंपनियों और विश्वविद्यालयों के जरिए भी जासूसी कर रहा है. दस्तावेज बताता है कि 2022 में यूक्रेन पर हमले से ठीक तीन दिन पहले FSB ने ‘एंटेंटे-4’ नाम का एक खास कार्यक्रम शुरू किया. इसका मकसद चीनी जासूसों को रोकना था. एजेंसी ने अपने अधिकारियों को चीनी मैसेजिंग ऐप वीचैट पर नजर रखने और रूसियों को चेतावनी देने का आदेश दिया कि चीन उनका फायदा उठा सकता है.

रूस का चीन ही सहारा

यह FSB रिपोर्ट के दस्तावेज भले दिखाता हो कि रूस को चीन पर भरोसा नहीं, लेकिन उसे चीन जरूरत है. दरअसल यूक्रेन युद्ध के बाद कई तरह के प्रतिबंध रूस पर लगे हैं, लेकिन चीन की मदद से उसकी अर्थव्यवस्था टिकी है. चीन रूसी तेल का एक बड़ा खरीदार है. बदले में वह कंप्यूटर चिप्स, सॉफ्टवेयर और सैन्य उपकरण देता है. दोनों देश फिल्म से लेकर स्पेस तक साथ काम करने की इच्छुक हैं.लेकिन FSB का कहना है कि सावधानी जरूरी है.

रूस एर चीन में शक का माहौल

FSB रिपोर्ट के दस्तावेज से पता चलता है कि चीन भी रूस पर भरोसा नहीं करता. रूस से लौटने पर चीन अपने एजेंटों की कड़ी जांच करता है, जिसमें पॉलीग्राफ टेस्ट शामिल है. चीन में पढ़ने वाले 20,000 रूसी छात्रों पर नजर रखता है. रूस को लगता है कि चीन उसकी कमजोरी का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है. फिर भी, पुतिन चीन के साथ रिश्ते को और गहरा करना चाहते हैं.

चीन का इतिहास और वर्तमान में उसकी भू-राजनैतिक नीतियाँ काफी हद तक इस रिपोर्ट की सच्चाई को सही ठहराते है. इतिहास में रूस द्वारा ‘पीठ में छुरा घोंपने’ (Backstabbing) के प्रमाण न के बराबर ही हैं लेकिन चीन के संबंध में यह बात सौ फीसदी प्रमाणित है कि, चीन कभी भी किसी को दोस्त नहीं मानता, वह सिर्फ अपने व्यापार को बढ़ाने तथा  विश्व आर्थिक और सैन्य ताकत बनने के लिए उनका इस्तेमाल करता है चाहे वह समान विचार वाले समाजवादी देश रूस, वियतनाम या पड़ोसी, ताइवान, फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया, जापान, कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, भारत ही क्यों न हों।

FSB रिपोर्ट भले की कुछ कहे लेकिन रूस के विघटन के बाद से चीन विश्व में उभरती हुई सैन्य और आर्थिक शक्ति है जो अमेरिका के वर्चस्व को चुनौती दे रहा है।

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